काटने की गति
जिस गति के साथ एक उपकरण पिसाई के दौरान चलता है, उसे काटने की गति कहते हैं.
उदाहरण स्वरूप, एक बेल्ट सैंडर मशीन के सन्दर्भ में यह संचलन गति है और एक कोण ग्राइंडर के सन्दर्भ में यह काटने अथवा पीसने वाले डिस्क की घूर्णी गति है. इसे अधिकतम संचालन गति भी कहा जाता है.
पिसाई के दौरान काटने की गति की निम्न सूत्र के आधार पर गणना की जाती है:
Vc = काटने की गति [m/s]
D = उपकरण का व्यास [mm]
n = घूर्णी गति [1/min.]
काटने की गति और फ़ीड दर मिल कर काटने की प्रक्रिया के समय पर एक निर्णायक प्रभाव डालते हैं और इस साथ-साथ ही समय की प्रति इकाई के लिए आउटपुट/उत्पादन मात्रा और प्राप्त परिष्कृत सतह की गुणवत्ता पर भी. कटाई की गति के साथ-साथ ब्लेड का तापमान भी बढ़ता रहता है, अर्थात कटाई की गति में कोई भी बढ़ोतरी उपकरण की टूट-फूट में वृद्धि करती है जिससे उपकरण कासेवा जीवनकम हो जाता है. पिसाई के दौरान इष्टतम काटने की गति का चयन प्राथमिक रूप से संसाधित किए जाने वाले पदार्थ/ सामग्री पर निर्भर होता है.
लागू मानक, सुरक्षा कारणों से यह निर्दिष्ट करते हैं की ज्यादातर मामलों में घूर्णी अपघर्षक उपकरणों की अधिकतम स्वीकार्य काटने की गति = अधिकतम संचालन गतिहै.
क्षेत्र में आगे के विषय
- ढेरी
- एक अपघर्षक उपकरण की आक्रामकता
- एंटिस्टैटिक कोटिंग
- तल
- बेल्ट जोड़
- कोटिंग घनत्व
- इलेक्ट्रोस्टैटिक कोटिंग
- फ़्लेक्सिंग
- अपघर्षक दानों के प्रकार
- एक अपघर्षक डिस्क की कठोरता
- अपघर्षकों के छेद पैटर्न
- अपघर्षक उपकरणों की अधिकतम संचालन गति
- माइक्रोक्रिस्टलाइन
- न्यूनतम प्रस्फोट गति
- मल्टीबॉन्ड
- oSa (Organisation for the Safety of Abrasives)
- निष्क्रिय परत
- सेवा जीवन
- सुरक्षा
- अपघर्षकों का भंडारण
- अपघर्षकों के उत्पादन में शीर्ष कोट
- टर्बो सेगमेंट
- वल्कनित रेशा
